Friday, 25 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एवं ताल्लुका विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में विधिक साक्षरता शिविर आयोजित

यौन उत्पीड़न की घटनाओं के प्रति जागरूक रहें, हिचकिचायें नहीं- डाॅ. विश्नोई


लाडनूँ, 25 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एवं ताल्लुका विधिक सहायता समिति के तत्वावधान में महाप्रज्ञ-महाश्रमण आॅडिटोरियम में यौन उत्पीड़न, कानूनी अधिकार एवं न्यायिक संरक्षण विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। सिविल न्यायाधीश एवं प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडनायक (कनिष्ठ वर्ग) डाॅ. पवन कुमार विश्नोई ने कहा कि विधायिका ने बहुत सारे कानून बनाये हैं, लेकिन हर व्यक्ति उनके बारे में पूरी जानकारी नहीं रखता, इसलिए विधिक साक्षरता आवश्यक है। उन्होंने पोक्सो कानून के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे अपने साथ घटित किसी भी घटना के बारे में बताने से हिचकिचाते हैं, लेकिन अभिभावकों को बच्चों के व्यवहार व हरकतों को देखकर उसका आभास लगाना चाहिए और उनके प्यार से पूछना चाहिए। अगर किसी बच्चे के साथ लगातार ऐसी घटनाएं हो रही हैं और उन्हें नहीं रोका जाता है तो वे बड़े अपराध से जुड़ जाते हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति किसी अश्लील साहित्य या ऐसी कोई वस्तु, शरीर का कोई अंग लैंगिक आशय से दिखाता है या इलेट्रोनिक उपकरणों से पीछा करता है तो वह यौन उत्पीड़न है और ऐसा किसी बच्चे के साथ करने पर वह बाल यौन उत्पीड़न होता है। उन्होंने वहां मौजूद विद्यार्थियों से कहा कि वे सदैव जागरूक रहें और कानून की जानकारी सबको प्रदान करें व कानून का उपयोग भी करें।

सोच बदलें, आवाज उठायें

सहायक लोक अभियोजक आनन्द व्यास ने बताया कि संविधान सबको मौलिक अधिकार देता है और न्यायपालिका उन अधिकारों का संरक्षण करती है। पूरे देश में यौन उत्पीड़न की घटनाएं बढ रही है, ये पिछले 10-15 सालों से अधिक है, क्योंकि अभिभावकों ने अपने बच्चों की उपेक्षा शुरू कर दी। जरूरी यह है कि बच्चों को खुलकर बताने का माहौल प्रदान करें। समय बदल रहा है और इसके साथ हमें भी बदलने की जरूरत है। आप अपने परिवार से इसकी शुरूआत करें, तो समाज तक बात पहुंचेगी और पिफर जिले व राष्ट्र में बदलाव आयेगा। सोच बदलें और सहन करने का आदत बदलें। जब तक पीड़ित स्वयं लड़ने के लिऐ तैयार नहीं होंगे तब तक न्याय नहीं मिलेगा तथा कोर्ट व कानून कुछ नहीं कर पाएंगे। कहीं भी गलत हो रहा है तो आंखें बंद करके नहीं निकलें, बल्कि सजग रह कर आवाज उठायें। यौन उत्पीड़न रोकने का सबसे बड़ा जिम्मा स्वयं पर ही होता है। उन्होंने बिना सहमति, इच्छा के विरूद्ध लैंगिक कृत्य करना, प्रयास करना या उकसाना, पीछा करना आदि सभी यौन उत्पीड़न बताया तथा कहा कि यह किसी भी आॅफिस, प्राईवेट क्षेत्र सभी जगह हो सकता है। उन्होंने छोटी हरकतों को महिलाओं द्वारा नहीं बताने व उनकी उपेक्षा करने से कृत्य करने वाला का हौसला बढ जाता है और वहबड़ा अपराध भी कारित कर देता है। इसलिए आवाज उठाने की हिम्मत करें, इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी।

नैतिक मूल्यों की शिक्षा आवश्यक

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने अंत में अपने सम्बोधन में कहा कि अगर नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी जावे तो इन समस्याओं को कम किया जा सकता है। उन्होंने संयुक्त परिवार का उदाहरण देते हुए कहा कि इसमें यौन शोषण व अपराध संभव नहीं होते। बिरादरी की व्यवस्था में वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम, घरेलु नौकरों आदि की जरूरतें खत्म हो जाती है। उन्होंने नैतिक मूल्यों की शिक्षा को स्वीकार करना जरूरी बताया तथा कहा कि जीवन की अधिकांश मुश्किलों को इससे समाप्त किया जा सकता है। कार्यक्रम का संचालन डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने किया। इस अवसर पर बार संघ के पूर्व अध्यक्ष चेतन सिंह शेखावत, छोगाराम बुरड़क, न्यायिक कर्मचारी कपिल व अजीज खां आदि मौजूद थे।

Tuesday, 22 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समर प्रोग्रामों में : नृत्य, कंप्यूटर, योग, स्पोकन इंगलिश आदि का प्रशिक्षण

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के समर प्रोग्रामों में 337 प्रशिक्षणार्थी लाभान्वित


लाडनूँ, 22 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में कैरियर काउंसलिंग सेल के अन्तर्गत संचालित की जा रही ग्रीष्मकालीन कक्षाओं में शहर के 337 प्रशिक्षणार्थी विभिन्न पाठ्यक्रमों से लाभान्वित हो रहे हैं। काउंसलिंग सेल के समन्वयक डाॅ. जुगल किशोर दाधीच ने इन समर कक्षाओं का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने बताया कि सेल के तहत अभिरूचि एवं व्यावसायिक कौशल की दृष्टि से तैयार किऐ गये कुल 10 समर प्रोग्रामों में से 8 प्रोग्राम संचालित किऐ जा रहे हैं। इनमें इंटीरियर डिजाईन एंड डेकोरशन, हेयर एंड स्किन केयर, कम्प्यूटर प्रशिक्षण, स्पोकन इंगलिश, योगा प्रशिक्षण, मार्शल आट्र्स, डांस, स्पोर्ट्स के पाठ्यक्रमों में ये प्रशिक्षणार्थी नियमित प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। डाॅ. दाधीच ने बताया कि जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कॅरियर काउंसलिंग सेल के तत्वावधान में हर वर्ष ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय का सदुपयोग करने के लिऐ तैयार शाॅर्ट टर्म प्रोग्राम संचालित किऐ जा रहे हैं, जिनमें इस क्षेत्र के युवक-युवतियां बड़ी संख्या में लाभान्वित हो रहे हैं। रामनारायण गेणा ने बताया कि विषय विशेषज्ञ डाॅ. अशोक भास्कर, नीतू सुथार, नुपूर जैन, सोमवीर सागवान, महेश शर्मा, ताम्बी दाधीच, कमलेश जगवानी और रितू द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।

Monday, 21 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आतंकवाद विरोधी दिवस पर शपथ दिलवाई

संविधान के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने वालों पर नियंत्रण आवश्यक- कक्कड़


लाडनूँ, 21 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलसचिव विनोद कुमार कक्कड़ ने कहा है कि देश का सम्पूर्ण ताना-बाना हमारे संविधान के अन्तर्गत निहित है। इस ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने का कार्य ही आतंकवाद है। देश कानून या संविधान के दायरे में ही कार्य करता है, अगर उसी को छिन्न-भिन्न कर दिया जाता है तो फिर कोई नियंत्रण ही नहीं रह पायेगा। वे यहां राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस के अवसर पर सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने देश के हर नागरिक के लिए सजग व सर्तक रहना आवश्यक बताते हुऐ कहा कि बस या ट्रेन से सफर करने पर किसी भी लावारिश वस्तु या सामान होने पर तत्काल उसकी सूचना पुलिस को दें। जागरूकता हर नागरिक की जिम्मेदारी होती है, हमें केवल सीसी टीवी कैमरों के भरोसे नहीं रहना चाहिऐ, बल्कि अपनी स्वयं की भूमिका अवश्य समझनी और निभानी चाहिऐ। दूरस्थ शिक्षा निदेशक प्रो. आनन्दप्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि केवल सैनिक ही आतंकवाद से निपटते रहें, यह नहीं होकर हर नागरिक को अपना कर्तव्य समझना होगा और अपने स्तर पर आतंकवाद से निपटने और उसके विरोध में भूमिका तय करनी होगी। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त स्टाफ को आतंकवाद का डटकर विरोध करने, सामाजिक सद्भाव व सूझबूझ कायम रखने, मानवीय मूल्यों को खतरा पहुंचाने वाली विघटनकारी शक्तियों से लड़ने की शपथ दिलवाई गई। कार्यक्रम में आर.के. जैन, डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत, डाॅ. युवाराज सिंह खंगारोत, मोहन सियोल, डाॅ. अमिता जैन, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. गोविन्द सारस्वत, प्रो. बीएल जैन, डाॅ. जसबीर सिंह, रमेशदान चारण आदि उपस्थित थे। इससे पूर्व शिक्षा विभाग में भी आतंकवाद विरोधी दिवस मनाया गया तथा समस्त छात्राध्यापिकाओं एवं स्टाफ को भी शपथ दिलवाई गई। इस अवसर पर बीएड की छात्राओं अंजू, प्रीति स्वामी, भव्या ने आतंकवाद दिवस मनाए जाने के कारण, आतंकवाद के दुष्परिणामों एवं आतंकवाद से निपटने के उपायों के बारे में बताया। कुलसचिव विनोद कुमार कककड़ ने संविधान की रक्षा को आवश्यक बताया तथा संविधान विरोधी हरकतों से निपटना आवश्यक बताया। विभागाध्यक्ष प्रो. बी.एल. जैन ने आतंकवाद को पनाह देने वालों को गलत बताया तथा कहा कि आतंकवादी किसी के नहीं होते, ये समस्त मानव जीवन के लिऐ खतरा पैदा करते हैं। उन्होंने आतंकवादियों के बारे में जानकारी तत्काल पुलिस को देने की जरूरत बताई।

Wednesday, 16 May 2018

देश का अनूठा विश्वविद्यालय, जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) जहां हर चीज अलहदा है

वृद्धों व साधुओं को शिक्षा, योग व जीवन विज्ञान से व्यक्तित्व विकास, जीवन मूल्यों व मानव कल्याण को प्राथमिकता, संस्कार व कॅरियर निर्माण को बनाया शिक्षा के साथ आवश्यक

लाडनूँ, 16 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) पूरे देश में एक अनोखा विश्वविद्यालय कहा जा सकता है। यहां अन्य विश्वविद्यालयों से बिलकुल अलग माहौल है, जहां अनुशासन, चरित्र, शांति और सुरम्यता का वास मिलेगा। विद्यार्थियों में कहीं कोई उच्छृंखलता, असौम्यता या आवेश देखने को नहीं मिलेगा। सभी बिल्कुल शांत, अनुशासित व सद्प्रवृतियों से युक्त मिलेंगे। यहां का हरीतिमा युक्त प्राकृतिक, शांत, मनोरम व आध्यात्मिक वातावरण बरबस ही लोगों को आकर्षित करने में सक्षम है। जैन विद्या व प्राच्य दर्शन के विकास, प्रसार, अध्ययन व शोध के उद्देश्य से संस्थापित इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में प्राकृत, संस्कृत, योग व जीवन विज्ञान, अहिंसा एवं शांति के साथ अन्य समस्त आवश्यक शैक्षणिक विषयों एवं स्किल डेवलपमेंट के विषयों का अध्ययन भी करवाया जाता है। यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) मूल्यपरक शिक्षण-प्रशिक्षण के लिए समर्पित है। इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की विशेषताओं पर गौर करेंगे तो आश्चर्य अवश्य होगा कि इस युग में भी कोई इस तरह का शिक्षण केन्द्र होगा जो प्राचीन गुरूकुलों और आधुनिक शिक्षण प्रणाली का समन्वित स्वरूप हों। इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) की विशेषता है कि यहां जीविकोपार्जन के साथ जीवन जीने की शिक्षा दी जाती है। इसकी गतिविधियां लाभ के लिए संचालित नहीं होकर मानव कल्याण के निमित संचालित होती है।

ध्यान व प्रार्थना से शुरू होते हैं कार्य

इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में चाहे विद्यार्थी हों या शिक्षक अथवा गैर शैक्षणिक कर्मचारी - सभी अपना कार्य नियमित प्रार्थना व ध्यान से शुरू करते हैं। यहां प्रतिदिन समस्त कर्मचारियों को प्रार्थना व ध्यान करने होते हैं तथा इसके पश्चात उनकी कार्यस्थल की दिनचर्या शुरू की जाती है। यही कारण है कि यहां का समस्त स्टाफ स्वभाव से विनम्र, अनुशासित, शांत व व्यवहारिक है। नियमित ध्यान के कारण उनके स्वभाव, व्यवहार व जीवनचर्या में बदलाव आता है और वह उनके कार्य में परिलक्षित होता है। जब स्टाफ या शिक्षक संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में नम्र व शांत होंगे तो उनके आचरण को देखकर संस्कारित होने वाले विद्यार्थी भी निश्चित रूप से उनके अनुरूप ही होंगे।

अध्यात्मिक अनुशासन और दिशा-निर्देशन

यह देश का पहला संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) होगा, जिसमें कुलपति एवं कुलाधिपति के अतिरिक्त एक पद और तय किया गया है, और वह है अनुशास्ता का पद। यह पद संस्थान का संवैधानिक पद है। अनुशास्ता के पद पर धर्माचार्य होते हैं, जो संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) को अपने नैतिक निर्देशों से लाभान्वित करते हैं। जैन श्वेताम्बर तेरापथ धर्मसंघ के नौंवे आचार्य आचार्यश्री तुलसी यहां इसके अनुशास्ता थे। उनके बाद द्वितीय अनुशास्ता के रूप में आचार्यश्री महाप्रज्ञ रहे और वर्तमान में आचार्य श्री महाश्रमण इस संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अनुशास्ता है। इनकी आध्यात्मिक वैचारिक रश्मियों से सम्पूर्ण संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) आलोकित होता है और उनकी तेजस्विता से प्रभावित होता है। यह उनका ही प्रभाव है कि यहां आने वाला हर विद्यार्थी स्वतः ही अपने स्वभाव में परिवर्तन पाता है। संस्थान के समस्त शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी भी इन धर्मगुरूओं के प्रभामंडल से ओजस्वित रहते हैं।

प्रोफेसरों व व्याख्याताओं की मानद सेवायें

इस मायने में भी यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) सबसे अलहदा है कि यहां अपनी मानद सेवायें प्रदान करने वाले प्रोफेसरों व व्याख्याताओं की तादाद काफी है। यहां उच्च शिक्षा प्राप्त पीएचडी व नेट किये हुए समण-समणियां भी अपनी अध्यापन सेवायें प्रदान करते हैं। उनकी निःशुल्क सेवाओं का लाभ यहां संस्थान को लगातार मिलता रहा है। उनके द्वारा शिक्षण कार्य करवाये जाने से विद्यार्थियों में स्वतः ही अनुशासन, समयबद्धता, चरित्र, सामाजिक समर्पण आदि गुणों का विकास संभव हो पाता है। समणियों की निःस्वार्थ भाव से की जाने वाली संस्थान  की सेवा अपने आप में अनूठी है। इनकी सेवायें विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के मापदंडों पर भी खरी उतरती है।

चारित्रिक व नैतिक वार्तालाप-व्याख्यान

संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समय-समय पर विभिन्न धर्मगुरूओं, संत-महात्माओं एवं महत्वपूर्ण हस्तियों-विद्वानों के प्रवचन-व्याख्यान, वार्तालाप, चर्चा आदि का आयोजन किया जाता है, जिससे संस्थान को चारित्रिक व नैतिक सम्बल प्राप्त होता है। जीवन के प्रति दृष्टिकोण, नैतिकता के प्रसार, चारित्रिक क्षमता वृद्धि आदि का लाभ इनसे विद्यार्थी उठा पाते हैं। इससे उनमें सम्मान की भावना, सांस्कृतिक मूल्यों का विकास और जीवन मूल्यों का समावेश संभव होता है। यहां संचालित विभिन्न व्याख्यानमालाओं में विभिन्न विद्वानों द्वारा दिया जाने वाला प्रस्तुतिकरण विद्यार्थियों में ज्ञान वृद्धि के साथ उनके जीवन में उपयोगी सिद्ध होने वाला होता है।

मूल्यपरक शिक्षा के लिये समर्पित संस्थान

इस संस्थान की स्थापना के पीेछे आचार्य तुलसी की दूरदृष्टि रही थी और नैतिक जीवन मूल्यों की समाज में पुनर्स्थापना को मुख्य उद्देश्य बनाकर ही इसे शुरू किया गया था। अपनी संस्थापना से लेकर आज तक यह संस्थान मूल्यपरक शिक्षण-प्रशिक्षण के लिये समर्पित है। यहां जीवन विज्ञान की शिक्षा को पाठ्यक्रम में सम्मिलित किया गया है तथा पृथक विषय के रूप में भी जीवन विज्ञान की डिग्री दी जाती है। जीवन विज्ञान में जीवन मूल्यों पर पूरा ध्यान दिया जाता है। यहां का आध्यात्मिक वातावरण, संतों का सामीप्य और विद्यार्थी-निमित तय मर्यादाओं के पालन से विद्यार्थियों में चारित्रिक विकास एवं मूल्यों का समावेश होने से उनका जीवन उज्जवल बन पाता है। इस संस्थान का ध्येय वाक्य है- ‘णाणस्स सार मायारो‘ अर्थात ज्ञान का सार आचार है। इस ध्येय वाक्य के अनुरूप यहां दुनियावी शिक्षा के साथ व्यक्तिगत आचरण की शुद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

भोजन एवं आवास की निःशुल्क सुविधा

संभवतः यह पहला संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) होगा, जहां विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ निःशुल्क छात्रावास एवं भोजन की सुविधा उपलब्ध है। यहां जैन विद्या, प्राकृत एवं संस्कृत भाषा में स्नातकोत्तर करने के लिए प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को यह सुविधा दी जाती है। इनमें अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं के लिये यहां अध्ययन की सुविधा भी पूर्ण रूप से निःशुल्क है। अन्य पाठ्यक्रमों में भी शुल्क अतिन्यून होने व छूट उपलब्ध होने से विद्यार्थियों को आर्थिक दृष्टि से नहीं सोचना पड़ता, फिर यहां छात्रवृति की सुविधा भी होने से विद्यार्थियों को पढाई बोझ नहीं लग पाती है।

शोध-परियोजनाओं के लिये खर्च की व्यवस्था

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में शोध को विशेष महत्व दिया जाता है, इसके लिये विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का संचालन भी संस्थान द्वारा किया जाता रहा है। नवाचारी शोध प्रोजेक्ट के तहत पायलट प्रोजेक्ट के लिये 50 हजार, माइनर प्रोजेक्ट के लिये 2 लाख, और मेजर प्रोजेक्ट के लिये 10 लाख रूपयों का वितीय सहयोग संस्थान की ओर से उपलब्ध करवाया जाता है। इस राशि का उपयोग शोधकर्ता अपने शोध कार्य के लिये उपकरण, पुस्तकें, जर्नल, स्टेशनरी, प्रिंटिंग, विश्लेषण सेवायें प्राप्त करने तथा आवश्यक यात्रा, फील्ड वर्क, सेमिनार, वर्कशाॅप आदि के लिये कर सकता है। कोई संस्थान अपने खर्च से शोध परियोजनाएं संचालित करें, दुर्लभ है।

वृद्धों व साधुओं के लिए भी पढाई की व्यवस्था

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) ने जीवन के अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुके लोगों में भी पढाई के प्रति ललक जगा दी है। यहां के दूरस्थ शिक्षा निदेशालय से बड़ी संख्या में देश भर के बड़ी आयु के लोग बीए से लेकर एमए और पीएचडी तक का अध्ययन व शोध कर रहे हैं एवं डिग्री प्राप्त कर रहे हैं। यहां 60 से 80 वर्ष की आयु में भी पढने वाले विद्यार्थी लगातार रहे हैं। इनके अलावा यहां अपरिग्रही साधु-साध्वियों के लिये निःशुल्क शिक्षण व्यवस्था उपलब्ध हैं वे देश में कहीं भी भ्रमण करते हुये अपनी पढाई जारी रख सकते हैं। बड़ी संख्या में साधु-साध्वियों ने यहां से उच्च शिक्षा प्राप्त करके डिग्रियां हासिल की हैं। पढाई को किसी भी कारण से बीच में छोड़ देने वाले जीवन के किसी भी हिस्से में अपनी पढाई वापस शुरू कर सकते हैं।

स्किल बेस्ड ट्रेनिंग व रोजगार निर्देशन

यहां संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में स्किल डेवलेपमेंट की पूरी व्यवस्था उपलब्ध है। योग, प्राकृतिक चिकित्सा के लिये यहां 3 माह का प्रमाण पत्र कार्यक्रम संचालित किया जाता है। इसके अलावा ब्यूटी कल्चर कार्यक्रम में ब्यूटी पार्लर खोलने, केश सज्जा करने, दुल्हन तैयार करने आदि का कोर्स करवाया जाता है। इलेक्ट्रिक एवं इलेक्ट्रोनिक्स उपकरणों की मरम्मत व रखरखाव सम्बंधी प्रमाण पत्र कार्यक्रम भी युवाओं को निःशुल्क प्रदान करने की व्यवस्था है। यहां समर प्रोग्राम के अन्तर्गत शोर्ट टर्म कोर्सेज करवाये जाते हैं, जिनमें कुकिंग प्रशिक्षण, योगा ट्रेनिंग, इंटीरियर डिजाईन, क्राफ्टिंग एंड पेंटिंग, स्पोर्टस ट्रेनिंग, बेसिक कम्प्यूटर, हेयर एंड स्किन केयर, स्पोकन इंगलिश, डांस व मार्शल आर्ट के कोर्स शामिल हैं। यहां समाज कार्य विभाग के अन्तर्गत एम.एस.डब्लू. का दो वर्षीय स्नातकोतर कोर्स तो शत प्रतिशत प्लसमेंट वाला है। बीएड व एमएड के कोर्स भी कॅरियर के लिये बेहतरीन सिद्ध हो रहे हैं। इनके अलावा कॅरियर काउंसलिंग, गाईडेंस, कॅरियर व्याख्यान, ज्ञान केन्द्र में रोजगार सम्बंधी सहायता आदि के माध्यम से विद्यार्थियों को कॅरियर निर्माण की दिशा में सहायता मिलती है।

अंग्रेजी संवाद एवं कम्प्यूटर प्रशिक्षण में दक्षता

यहां सभी के लिये अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्प्रेषणता की तरफ पूरा ध्यान दिया जाता है। विद्यार्थियों को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिये तैयार करने के लिये अंग्रेजी व कम्प्यूटर में दक्षता आवश्यक होती है और इन दोनों ही विधाओं पर यहां पूरा जोर दिया जाता है। यहां हर विद्यार्थी के लिये अंग्रेजी माध्यम नहीं होने पर भी अंग्रेजी का ज्ञान व संवाद विधा अवश्य सिखाई जाती है। इसी तरह से कंप्यूटर का ज्ञान भी सबको करवाया जाता है, ताकि विद्यार्थी कहीं भी पीछे नहीं रह पाये।

महिला शिक्षा महत्वपूर्ण

यह संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) एक तरह से महिला शिक्षा को समर्पित कहा जा सकता है। यहां महिला शिक्षा पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है। संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अन्तर्गत संचालित आचार्य कालू कन्या महाविद्यालय में बीए, बीकाॅम, बीएससी के पाठ्यक्रमों में केवल बालिकाएँ ही प्रवेश ले सकती हैं। इसी प्रकार यहां शिक्षा विभाग में संचालित बीएड, एमएड, बीए-बीएड, बीएससी-बीएड पाठ्यक्रमों में भी केवल कन्याओं के लिये ही प्रवेश रक्षित है। आचार्य तुलसी की सोच के अनुरूप इस संस्थान में महिला शिक्षा को ही प्राथमिकता दी जाती है। यहां बालिकाओं की शिक्षा के साथ सुरक्षा, आत्मरक्षा, उचित देखभाल एवं उनके सर्वांगीण विकास पर पूरा ध्यान दिया जाता है।

Thursday, 10 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में निःशुल्क योग कक्षाओं का आयोजन

घुटनों के दर्द से बचना है तो पानी बैठ कर पीयें- डाॅ. माहेश्वरी

लाडनूँ, 10 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) अपने नित नये प्रयोगों और रचनात्मक चिंतन व कार्यों के लिए विख्यात है। संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आयोजित योग व ध्यान की निःशुल्क कक्षाओं का शुभारम्भ गुरूवार को सुबह प्रारम्भ किया गया। योग-कक्षा का संचालन करते हुये प्रशिक्षक डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने कहा कि व्यक्ति को पानी हमेशा बैठ कर ही पीना चाहिए। इससे अनेक बीमारियों से मुक्ति मिलती है। योग एवं ध्यान की इस कक्षा में सम्भागियों को प्रशिक्षण प्रदान करते हुए उन्होंने बताया कि पानी सदैव धीरे-धीरे अर्थात घूँट-घूँट कर पीना चाहिए और बैठकर पीना चाहिए। कभी भी खड़े होकर पानी नहीं पीना चाहिए। बैठक कर पानी पीने से घुटनों के दर्द से बचा जा सकता है। इसी प्रकार कभी भी बाहर से आने पर जब शरीर गर्म हो या श्वाँस तेज चल रही हो, तब थोड़ा रुककर, शरीर का ताप सामान्य होने पर ही पानी पीना चाहिए। खड़े होकर पानी पीने से गुर्दा, गठिया व जोड़ों के दर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है। ये कक्षाएं संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) द्वारा अपने शैक्षणिक व गैर शैक्षणिक स्टाफ के लिए निःशुल्क आयोजित की जा रही हैं। कक्षाएं प्रतिदिन प्रातः 8 से 9 बजे तक एक घंटे संचालित की जायेगी। अपने समस्त कार्मिकों के उत्तम शारीरिक स्वास्थ्य व मानसिक विकास के लिए इन कक्षाओं का आयोजन ग्रीष्मकालीन अवकाश के समय शुरू किया गया है। गुरूवार को इन कक्षाओं में ध्यान के बाद शरीर के समस्त जोड़ों के संचालन की विविध क्रियाओं का अभ्यास करवाया गया तत्पश्चात कायोत्सर्ग और कमर, घुटने, गर्दन आदि के व्यायाम करवाए गए।

नियमित योगासनों से अनेक बीमारियों का निरोध संभव- डाॅ. शेखावत

लाडनूँ, 11 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने यहां संचालित की जा रही योग कक्षा में सम्भागियों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं ध्यान के प्रयोग करवाए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग के इन आसनों एवं क्रियाओं का नियमित अभ्यास करने से कमर दर्द, ब्लड प्रेशर, गर्दन का दर्द, सिरदर्द आदि नहीं रहते तथा अनेक बीमारियों का शरीर में प्रवेश ही नहीं हो पाता। उन्होंने वस्त्र को स्वच्छ बनाने के लिए जो धोने की क्रिया होती है, वैसे ही शरीर की मांसपेशियों को शुद्ध करने के लिए यौगिक क्रिया आवश्यक है।

योग से स्वास्थ्य लाभ के साथ होता है कार्यशैली में परिवर्तन- प्रो. दूगड़
लाडनूँ, 14 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा है कि योग से व्यक्ति स्वस्थ रहता है तथा उसकी कार्यशैली में परिवर्तन आता है। योगसनों और क्रियाओं का लाभ तभी मिल पाता है, जब उन्हें नियमित रूप से लगातार किया जाता रहे। वे यहां लगाई जा रही योग कक्षा का अवलोकन कर रहे थे। उन्होंने सम्भागियों को सम्बोधित करते हुए नियमित रूप से प्राणायाम व योगासन करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने बताया कि संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में समस्त स्टाफ के लिए अनिवार्य रूप से शुरू की गई योग कक्षा का लाभ सभी को प्राप्त करना चाहिए। योग एवं जीवन विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. प्रद्युम्न सिंह शेखावत ने योग कक्षा में सम्भागियों को विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं प्राणायम के प्रयोग करवाये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि अपने स्वास्थ्य को सुधारने एवं मोटापा घटा कर शरीर को संतुलित बनाने के लिए भोजन का पूर्ण बनाना आवश्यक है। इसमें यथासंभव साबुत अन्न व फलों का प्रयोग करना चाहिए। फलों का जूस पीने के बजाये उन्हें खाने से शरीर को आवश्यक फाईबर और तत्व मिल पाते हैं। इसी प्रकार रिफाुइंड तेल के बजाये देसी घी अघिक लाभदायक होता है। भोजन के साथ शरीरिक मेहनत पर भी पूरा जोर देना चाहिए। जो व्यक्ति खाने-पीने पर पूरा ध्यान देता है और शरीर से कैलोरी जलाने पर भी ध्यान देता है, वह स्वस्थ रहता है तथा लम्बी आयु को प्राप्त होता है।

विपरीत परिस्थितियों में भी योग से पूर्ण स्वास्थ्य लाभ संभव- प्रो. दूगड़

लाडनूँ, 15 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ ने कहा कि योग से मनुष्य अपने किसी भी क्षेत्र में कार्य करते हुए विपरीत परिस्थितियों में भी अपने शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रख सकता है। योग को आवश्यक रूप से प्रतिदिन नियमित रूप से करना चाहिये। उन्होंने यहां संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में चल रही कार्मिकों की योग कक्षा के समापन सत्र को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि योगमय जीवन शैली को अपनाने से व्यक्ति अपने प्रकार की व्याधियों से मुक्त रह पाता है। उन्होंने कहा कि जो यौगिक क्रियायें, योगासनों एवं प्राणायाम के प्रयोग बताये हैं, उन्हें अपने घर पर नियमित अभ्यास का हिस्सा बनायें, ताकि उनका वास्तविक लाभ उठाया जा सके। योग प्रशिक्षक डाॅ. विवेक माहेश्वरी ने योग कक्षा में शामिल सभी सम्भागियों को आंख, कान, गर्दन, कमर, घुटनों आदि के स्वास्थ्य केे लिये विभिन्न यौगिक क्रियाओं, योगासनों एवं प्राणायम के प्रयोग करवाये। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि योग से शरीर के समस्त अवयव सक्रिय हो जाते हैं और वे सही रूप में कार्य करने लगते हैं। छोटी-छोटी क्रियायें नियमित रूप से करने पर उनका व्यापक शारीरिक लाभ मिलता है। इसलिये योगाभ्यास का आलस नहीं रखना चाहिये।

Wednesday, 9 May 2018

जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में अंग्रेजी सम्प्रेषण दक्षता निखारने हेतु कार्यशाला का आयोजन

सम्भागियों को बताये विभिन्न परिस्थितियों में अंग्रेजी संवाद कायम करने के तरीके

लाडनूँ, 9 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) में आयोजित अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्पर्क कला कार्यशाला में मंगलवार को विभिन्न काल्पनिक परिस्थियों का नाट्य प्रस्तुतिकरण करवाते हुए मनोरंजक ढंग से अंग्रेजी सम्भाषण को परिपक्व बनाया गया। विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला में लाडनूँ के पर्यटन व धार्मिक स्थलों के सम्बंध में गाइड व पर्यटकों के बीच वार्ता, रोगी व चिकित्सक के बीच के संवाद, जन्मदिन पर पार्टी आयोजित करने के लिए मित्रों के दबाव का वार्तालाप, लड़के व लड़की के रिश्ते के सम्बंध में दोनों पक्षों के बीच परस्पर सम्पर्क-संवाद तथा ट्रेन में बिना टिकिट के पकड़े गये यात्री एवं टिकिट चैकर के बीच की वार्ता को नाट्य-रूपान्तरित किया गया। कार्यशाला में निर्देशक डाॅ. गोविन्द सारस्वत व प्रो. रेखा तिवाड़ी ने सभी प्रतिभागियों को संवाद की कुशलता, शब्दों के चयन, व्याकरण के प्रयोग एवं बेझिझक अंग्रेजी वार्तालाप करने के नुस्खे बताये। गौरतलब है कि संस्थान के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़ के निर्देशानुसार विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं गैर शैक्षणिक स्टाफ को अविरल अंग्रेजी संवाद के लिए तैयार करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह निःशुल्क कार्यशाला एक माह तक संचालित की जायेगी।

झिझक दूर होने पर अंग्रेजी बोलना सरल- डाॅ. सारस्वत

लाडनूँ, 15 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के अंग्रेजी भाषा विभाग के तत्वावधान में विश्वविद्यालय के समस्त शैक्षिक एवं गैर शैक्षिक कार्मिकों के लिए आयोजित की जा रही अंग्रेजी सम्भाषण एवं सम्पर्क कला के विकास के लिए निःशुल्क कार्यशाला का मंगलवार को समापन किया गया। इस अवसर पर विभागध्यक्ष डाॅ. गोविन्द सारस्वत ने कहा कि अंग्रेजी को अपने कार्यस्थल व रोजमर्रा के जीवन की भाषा बनाने के लिए आवश्यक है कि अपनी दिनचर्या के हिस्सों में आवश्यक छोटे-छोटे वाक्यांश को प्रयोग में लाया जावे। जब तक अंग्रेजी बोलने की झिझक नहीं मिटेगी, उसे सरलता से नहीं बोला जा सकेगा। इसलिए नियमित अभ्यास को जारी रखा जाना चाहिए। कार्यशाला के सम्भागियों ने भी इस अवसर पर अपने विचार व अनुभव अंग्रेजी में साझा किये तथा कुछ सम्भागियों ने वार्तालाप के जरिये अपनी भावनायें व्यक्त की। विजय कुमार शर्मा, मुकुल सारस्वत, डाॅ. गिरीराज भोजक, डाॅ. हेमलता जोशी, डाॅ. बिजेन्द्र प्रधान, गीता पूनिया, डाॅ. बीएल जैन, सोनिका जैन डाॅ. सत्यनारायण भारद्वाज, कमल कुमार मोदी, डाॅ. विवेक माहेश्वरी, डाॅ. पुष्पा मिश्रा, डाॅ. वीरेन्द्र भाटी, डाॅ. अमिता जैन आदि ने इन कक्षाओं को लाभदायक बताया तथा कहा कि इससे सम्भागियों की अंग्रेजी बोलने की झिझक दूर हुई है।

अब विदेशों में भी अध्ययन कर पायेंगे जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) के विद्यार्थी

जैन विश्वभारती संस्थान का देश-विदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से एमओयू

लाडनूँ, 9 मई 2018। जैन विश्वभारती संस्थान (मान्य विश्वविद्यालय) निरन्तर वैश्विक स्तर पर अग्रसर हो रहा है। इसके अन्तर्गत दो विदेशी विश्वविद्यालयों से उसके एमओयू/एग्रीमेंट्स हैं। विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार वीके कक्कड़ ने बताया कि देश-विदेश के 9 विश्वविद्यालयों से जैन विश्वभारती संस्थान के साथ एमओयू हुये हैं, जिनमें विद्यार्थियों एवं फेकल्टी का एक्सचेंज कार्यक्रम तय किए गए हैं। इन शिक्षण संस्थानों व विश्वविद्यालयों से अन्तर्सम्बंधों के कारण जहां इस विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को विदेशों के विश्वविद्यालयों में नवीन शिक्षण पद्धतियों एवं तकनीकों को सीखने का अवसर मिलेगा, वहीं विदेशी विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को यहां आकर जैन विद्या, योग व जीवन विज्ञान, संस्कृत व प्राकृत भाषा, भारतीय संस्कृति, पाठ्यक्रमों एवं पद्धतियों को नजदीकी से देखने-समझने एवं सीखने का अवसर मिल पायेगा। कुलसचिव कक्कड़ ने बताया कि सिंगापुर की प्रज्ञा योग, बेल्जियम की घेंट यूनिवर्सिटी, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी जयपुर, स्वार्णिम गुजरात स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी गांधीनगर, कोबा की प्रेक्षाध्यान एकेडमी एवं स्वामी विवेकानन्द योग अनुसंधान विश्वविद्यालय बैंगलोर के साथ अन्तर्सम्बंध स्थापित किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ इस विश्वविद्यालय के साथ अन्तर्सम्बंध रहे हैं।